सिंगम्मा बसंत पी के उद्धरण

यहाँ आपकी आध्यात्मिक यात्रा पर कुछ विचारोत्तेजक उद्धरण हैं।

"आपके जीवन का प्रत्येक क्षण दिव्यता से ओतप्रोत है,

केवल प्रश्न यह है कि क्या आप उसे अनुभव करना जानते हैं।"

- सिंगम्मा बसंत पी

"आपके जीवन का प्रत्येक क्षण दिव्यता से ओतप्रोत है,

केवल प्रश्न यह है कि क्या आप उसे अनुभव करना जानते हैं।"

- सिंगम्मा बसंत पी

जब आँखें खुलती हैं, वह शक्ति का अनुभव है।

जब आँखें बंद होती हैं, वह शिव का प्रकटन है।

एक है परम सत्य, दूसरा है परम तत्त्व।

और आँखों के खुलने-बंद होने के बीच जो पवित्र स्पंदन है,

वही जीवंत निरंतरता — वही श्री देवी ललिता हैं।

-सिंगम्मा बसंत पी

जब गुरु कोई वचन सिखाने के लिए देते हैं, तो वह अंदर बदलने का आदेश होता है, सिर्फ समझने या सोचने के लिए नहीं।

अगर शिष्य जिम्मेदारी नहीं लेता और उसे हल्के में लेता है, तो जीवन उसे नहीं छोड़ेगा। वही सीख बार-बार अलग रूप में आएगी, जब तक वह विनम्रता से उसे सीख नहीं लेता।

जिस परेशानी की वह शिकायत करता है, वह कुछ और नहीं, बल्कि अनदेखी की हुई सीख ही है जो ज़्यादा ज़ोर से दस्तक दे रही है।

-सिंगम्मा बसंत पी

श्री देवी ललिता के तरीके मीठे-कड़वे और कड़वे-मीठे होते हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि वह क्या प्रकट करना चाहती हैं।

जब वह मीठा-कड़वा* होता है, तो वह हमें उसमें ले जाती हैं ताकि हम उससे (अनुभव लेकर) बाहर निकल सकें।

जब वह कड़वा-मीठा* होता है, तो वह हमें बाहर खींच लेती हैं ताकि हम वास्तव में अपनी मंजिल तक पहुँच सकें।

-सिंगम्मा बसंत पी

जब आप देवी के पास अपनी शिकायतों और हताशाओं के साथ जाते हैं, तो वह सबसे पहले आपके अहंकार (ईगो) को अपने नियंत्रण में लेकर उन्हें हल करती हैं।"

"यह मजेदार है पर इतना भी नहीं। लेकिन सच यही है, चाहे आप इसे पसंद करें या न करें। वह इसमें कोई समझौता नहीं करतीं।"

-सिंगम्मा बसंत पी

तुम वास्तव में शिव हो; जो बनने की कोशिश कर रहे हो वह सिर्फ “तुम्हारा नाम” है।

-सिंगम्मा बसंत पी

P.S. अंत में अपना नाम जोड़ो, और देखो कि भ्रम कैसे प्रकट होता है।

तुम्हारे पास जो कुछ भी है, और जिसे तुम अपना मानते हो — वह तुम्हारा नहीं है!

यही वह बिंदु है जहाँ आध्यात्मिकता और उसका मार्ग प्रकट होता है — इससे पहले नहीं।

-सिंगम्मा बसंत पी